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#कोल_सिटी_न्यूज़#धनबाद (9102277708):- हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का पर्व अत्यंत श्रद्धा, आस्था और उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह पर्व उस पावन तिथि का प्रतीक है, जब सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण का आरंभ होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उत्तरायण को देवताओं का दिन कहा गया है, जिसे अत्यंत शुभ माना गया है।
वर्ष 2026 में सूर्य देव 14 जनवरी, बुधवार को रात्रि 9 बजकर 11 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसी के साथ सूर्य उत्तरायण हो जाएंगे और खरमास की समाप्ति हो जाएगी। यह जानकारी ऋषिकेश पंचांग के अनुसार दी गई है।
शास्त्रोक्त नियम के अनुसार निर्णय
धर्मसिन्धु ग्रंथ में वर्णित नियम के अनुसार—
यदि मकर संक्रांति सूर्यास्त के बाद, प्रदोष काल या मध्य रात्रि में लगती है, तो स्नान-दान और पुण्यकाल अगले दिन माना जाता है।
इसी शास्त्रीय नियम के आधार पर वर्ष 2026 में मकर संक्रांति का पुण्यकाल 15 जनवरी, गुरुवार को मनाया जाएगा।
दान-पुण्य का विशेष महत्व
मकर संक्रांति के दिन किए गए दान को कई गुना फलदायी माना गया है। इस दिन— गंगा एवं अन्य पवित्र नदियों में स्नान तिल, गुड़, खिचड़ी, उड़द दाल, अन्न, वस्त्र एवं ऊनी कपड़ों का दान ब्राह्मणों, पुरोहितों, जरूरतमंदों और गरीबों को दान करने से धन-धान्य, आरोग्य, यश और मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही कुंडली के दोषों से मुक्ति और पितृ दोष की शांति भी मानी जाती है।
सूर्य उपासना और पितृ तर्पण
मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव की पूजा करने से तेज, स्वास्थ्य और समृद्धि का वरदान प्राप्त होता है। पितरों के तर्पण से उनकी कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
आध्यात्मिक महत्व
आध्यात्मिक दृष्टि से उत्तरायण काल को साधना और आत्मिक उन्नति के लिए श्रेष्ठ माना गया है। महाभारत के महान योद्धा भीष्म पितामह ने भी उत्तरायण काल में ही देह त्याग किया था, इसलिए यह काल मोक्षदायक माना गया है।
मकर संक्रांति 2026 श्रद्धा, दान और साधना का महापर्व है, जो जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति का संदेश देता है।
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